NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 16 – Ravindra Kalekar

CBSE NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 16 – रविन्द्र केलेकर (Ravindra Kalekar) – पतझर में टूटी पत्तियां

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

1. शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?

उत्तर:- शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग होता है क्योंकि शुद्ध सोने में कोई मिलावट नहीं होती, वहीं गिन्नी के सोने में थोडा-सा ताँबा मिलाया हुआ होता है। इस कारण गिन्नी का सोना अत्यधिक चमकता है और शुद्ध सोने से ज़्यादा मजबूत भी होता है।




2. प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?

उत्तर:- प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट उन्हें कहा जाता है, जो शुद्ध आदर्शों में व्यवहारिकता मिला देते है।

3. पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?

उत्तर:- प्रस्तुत पाठ के सन्दर्भ में शुद्ध आदर्श वह है जिनमें व्यक्ति लाभ-हानि के बारे में न सोचकर सिर्फ अच्छे-बुरे के बारे में सोचता है। शुद्ध आदर्शों में व्यावहारिकता के लिए कोई जगह नहीं होती। जिसमें सबकी भलाई छुपी होती है और जो समाज के शाश्वत मूल्यों को बनाए रखने में सक्षम होते है, वही शुद्ध आदर्श कहलाते है।

4. लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगने की बात क्यों कही है?

उत्तर:- जापान के लोग अमेरिका से प्रति श्रद्धा कर रहे हैं और इस होड़ में उनका दिमाग सबसे तेज़ रफ़्तार से चलता है, इसलिए लेखक ने जापानियों के दिमाग में स्पीड का इंजन लगने की बात कही है।

5. जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?

उत्तर:- जापानी में चाय पीने की विधि को “चा-नो-यू” कहते हैं जिसका अर्थ है – ‘टी-सेरेमनी’।

6. जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?

उत्तर:- जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, वह स्थान पारम्परिक ढंग से सजाया हुआ और शांतिपूर्ण होता है। वहां अत्यंत गरिमापूर्ण और शांतिपूर्ण ढंग से चाय पिलाई जाती है। उस छोटी सी पर्णकुटी में एक बार में केवल तीन ही लोग बैठकर चाय पी सकते हैं।

CBSE NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 16 – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-

1. शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?

उत्तर:- शुद्ध आदर्शों की तुलना सोने से और व्यवहारिकता की तुलना तांबे से इसलिए की गई है क्योंकि शुद्ध आदर्श सोने के समान होते हैं, जो अपने लचीलेपन के कारण ज़्यादा चल नहीं पाते; लेकिन अगर इन्हीं शुद्ध आदर्शों में थोड़ा-सा व्यवहारिकता का तांबा मिला दिया जाए तो उसकी चमक बढ़ जाती है और वह मजबूत भी बन जाता है।




2. चाजीन ने कौनसी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?

उत्तर:- चाजीन ने मेहमानों का स्वागत करने से लेकर उसे उनके सामने रखने तक की सभी क्रियाएं बहुत ही शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण ढंग से पूरी की। सबसे पहले उसने प्रेमपूर्वक मेहमानों का स्वागत किया, उन्हें बैठने की जगह दिखाई, फिर चाय बनाने के लिए अंगीठी सुलगाकर शांतिपूर्वक चाय बनाई। उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जय-जयवंती के सुर गूंज रहे हों।

3. ‘टी-सेरेमनी’ में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?

उत्तर:- ‘टी-सेरेमनी’ में सिर्फ तीन आदमियों को प्रवेश दिया जाता था क्योंकि इस विधि में सबसे मुख्य चीज होती है शांति; और उस छोटी-सी पर्णकुटी में शांति बनाए रखने के लिए भीड़ जमा करना और बातें करना वर्जित था। वहां व्यक्ति को अपने भविष्यकाल और भूतकाल को भुलाकर कुछ समय शांति से बैठाया जाता था और दुनिया की भीड़ भाड़ से परे कुछ क्षण अपने वर्तमान को जीने का मौका दिया जाता था।

4. चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?

उत्तर:- चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि जैसे उनके दिमाग की रफ्तार धीरे-धीरे धीमे पड़ गई है और फिर बिल्कुल बंद हो गई। उनके मन मस्तिष्क से भूतकाल और भविष्यकाल दोनों का उड़ गए थे व उनको लगा मानो वे अनंतकाल में जी रहे हैं।

CBSE NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 16 – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

1. गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।

उत्तर:- गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी  क्योंकि वे दूसरों को आसानी से प्रभावित कर लेते थे। वह सत्य और अहिंसा जैसे आदर्शों में विश्वास रखते थे और इन्हीं आदर्शों के बलबूते पर उन्होंने हमारे देश को आजादी दिलाई। वे अपने जीवन में व्यवहारिकता को भी महत्व देते थे, लेकिन उन्होंने कभी आदर्शों को व्यवहारिकता के स्तर पर उतरने नहीं दिया बल्कि हमेशा व्यवहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाने की कोशिश की। इससे हमेशा आदर्शों का महत्व ही आगे आता रहता था।

2. आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:- हमारे विचार से जीवन में ईमानदारी, सत्य, अहिंसा, भाईचारा, परोपकार, जैसे मूल्य शाश्वत है और वर्तमान समय में ये सभी मुल्य महत्वपूर्ण है। प्रत्येक राष्ट्र के वैभव और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है कि उसके देशवासियों में प्रेम और भाईचारे की भावना हो, वे अपने देश, अपने काम और अपने कर्तव्य के प्रति पूरी तरह ईमानदार हो; व एक अच्छे समाज के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि उसके सभी लोगों में परोपकार, त्याग, एकता और भाईचारे की भावना हो।

3. अपने जीवन की किसी घटना का उल्लेख कीजिए जब –
(क). शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो।
(ख). शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।

उत्तर:-

(क). शुद्ध आदर्शों को पालन करने के लिए मैंने एक बार अपने ही एक मित्र के द्वारा की गई चोरी के बारे में अध्यापक को बता दिया था। इसकी वजह से अध्यापक ने मेरी प्रशंसा की और मुझे इनाम भी दिया; लेकिन इसकी वजह से उस मित्र ने मेरे भी सारे राज़ खोल दिया, जिनकी वजह से मुझे बहुत अपमानित होना पड़ा था।

(ख). एक बार जब मेरा ही प्रिय मित्र परचे बनाकर परीक्षा में नकल करने वाला था, तब शुद्ध आदर्शों के बतौर मैं उसके माता-पिता को इससे अवगत करा सकता था; लेकिन इससे हमारी मित्रता पर विपरीत असर पड़ सकता था। इस कारण मैंने ऐसा न करके, उसके सारे परचे एक दिन पहले ही फेंक दिए और उसे समझाया कि उसे अच्छी तरह पढ़ाई करनी चाहिए।




4. ‘शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना’, गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:- प्रस्तुत पाठ में लेखक ने शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट से शुद्ध आदर्शों में व्यवहारिकता की मिलावट को दर्शाया है। यहां शुद्ध सोना शुद्ध आदर्शों का दर्शाता है और ताँबा व्यावहारिकता का दर्शाता है। गाँधीजी का मुख्य उद्देश्य था हमारे देश को अंग्रेजों के शासन से मुक्त करवाना और इसके लिए उन्हें संपूर्ण भारतवासियों के साथ की जरूरत थी। एक अकेले या छोटे से समूह में कुछ नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने सिर्फ शुद्ध आदर्शों पर चलकर व्यवहारिकता की कीमत को पहचाना और उसे भी अपने जीवन में सही से उपयोग किया। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर उतरने नहीं दिया, बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर उठाने का प्रयास करते थे। इसलिए लोग उन्हें ’प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ भी कहते थे।

5. ‘गिरगिट’ कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी का सोना’ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘आदर्शवादिता’ और ‘व्यावहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्त्व है?

उत्तर:- प्रस्तुत पाठ के आधार पर हम यह कह सकते है कि व्यक्ति के जीवन में व्यवहारिकता के मुकाबले आदर्शवादिता अधिक महत्त्वपूर्ण है। जिस प्रकार एक अवसरवादी व्यक्ति सदैव अपना व्यवहार अवसर अनुसार बदल लेता है, उसी प्रकार व्यवहारिकता के माध्यम से भी व्यक्ति अपनी लाभ-हानि का अनुमान लगा लेता है और उसी प्रकार व्यवहार करता है जो उसके लिए लाभकारी हो। व्यावहारिकता से व्यक्ति को हमेशा लाभ होता है, लेकिन फिर भी हमारे समाज में मौजूद शाश्वत मूल्य शुद्ध आदर्शों की ही देन है। अत: जीवन में अच्छे व उच्च आदर्शों के साथ-साथ सही व्यावहारिकता भी महत्त्वपूर्ण है।

6. लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर:- प्रस्तुत कविता में लेखक ने बताया है कि जापानी लोग अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने लगे है। एक महीने का काम एक दिन में पूरा करने की कोशिश करते है। उनके दिमाग की रफ्तार भी तेज ही रहती है। इस भागदौड़ भरे जीवन में उनके पास अपने स्वास्थ्य के लिए भी समय नहीं होता और ना ही वे वर्तमान समय में जी पाते है। उनका दिमाग व शरीर कंप्यूटर की तरह बहुत ही अधिक तेजी से चलता है और इस कारण अंत में उनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है।

7. लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:- प्रस्तुत पाठ में लेखक ने कहा है कि वर्तमान ही सत्य है दौर प्रत्येक व्यक्ति को उसी में जीना चाहिए। अक्सर हम या तो गुजरे हुए दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझे रहते हैं या भविष्य के रंगीन सपने देखते हैं। इस प्रकार हम वर्तमान को छोड़कर, भूतकाल या भविष्यकाल में जीते है; जबकि असल में ये दोनों ही काल मिथ्या है। जब हम भूतकाल के अपने सुखों व दुखों के बारे में सोचते है, तब भी हम दुखी होते है क्योंकि हम गुजरे हुए कल को ना ही बदल सकते है और ना ही दोबारा जी सकते है। भविष्य की रंगीन कल्पनाएं भी हमें दुःख ही देती है, क्योंकि हम अपना वक्त सोचने में ज़ाया कर देते है और उन रंगीन सपनों को पाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर पाते।

CBSE NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 16 – निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

1. समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।

उत्तर:- प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने कहा है कि दुनिया में मौजूद सभी शाश्र्वत मुल्य आदर्शवादी लोगों की ही देन है, क्योंकि व्यवहारिकता आत्मकेंद्रित होती है लेकिन आदर्श पुरे समाज पर केन्द्रित होते है। व्यवहारिकता से तो केवल स्वयं का भला हो सकता है लेकिन आदर्शों से पुरे समाज में मुल्यों का निर्माण होता है जिनसे सभी की भलाई होती है।

2. जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है तब ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों’ के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है।

उत्तर:- प्रस्तुत पंक्ति में लेखक ने बताया है कि जब प्रैक्टिकल आइडियलिस्टों -जैसे लोग आदर्शों में व्यवहारिकता मिलाकर जीवन जीने लगते हैं, तब धीरे-धीरे आदर्श उनके जीवन से पूरी तरह मिट जाते हैं और व्यावहारिकता उनके जीवन में पूरी तरह हावी हो जाती है।

3. हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।

उत्तर:- प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने जापानियों के जीवन का वर्णन किया है। जापान के लोग अमेरिका व बाकी देशों से होड़ करने में लगे हैं और इसकी वजह से वे सामान्य जीवन न जीकर बहुत ही देश गति से दौड़ रहे हैं। इस भागदौड़ भरे जीवन में उनके पास ना अपने व अपनों के लिए समय है, ना रिश्ते-नाते और ना ही अच्छा स्वास्थ्य। इन्हीं कारणों की वजह से जापानियों में मानसिक बीमारियां बहुत आम है।




4. सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गुँज रहे हों।

उत्तर:- प्रस्तुत पंक्ति में लेखक ने उस छोटी-सी पर्णकुटी में मौजूद उस चाजीन की सभी भंगिमाओं को गरिमापूर्ण बताया है। जब वह चाजीन हर कार्य को बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से अंजाम दे रहा था, तब ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कोई बहुत ही महान कलाकार पूरी एकाग्रता से गीत गा रहा हो और हर तरफ उसका मधुर स्वर गुंजायमान हो रहा हो।

CBSE NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 16 – भाषा-अध्ययन

1. नीचे दिए गए शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-
व्यावहारिकता, आदर्श, विलक्षण, शाश्वत

उत्तर:-

(क). किताबी ज्ञान को व्यावहारिकता के साथ उपयोग करना ही उसका सही उपयोग है।
(ख). मनुष्य के जीवन में अच्छे आदर्शों का बहुत बड़ा महत्त्व होता है।
(ग). कमला विलक्षण प्रतिभा की धनी है।
(घ).मृत्यु मनुष्य-जीवन का एक शाश्वत सच है।

2. लाभ – हानि ‘ का विग्रह इस प्रकार होगा- लाभ और हानि

यहाँ द्वंद्व समास है जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं। दोनों पदों के बीच योजक शब्द का लोप करने के लिए योजक चिह्न लगाया जाता है। नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए –

माता-पिता, पाप-पुण्य, सुख-दुख, रात-दिन, अन्न-जल, घर-बाहर, देश-विदेश।

उत्तर:-

(क) माता-पिता = माता और पिता
(ख) पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
(ग) सुख-दुःख = सुख और दुःख
(घ) रात-दिन = रात और दिन
(ङ) अन-जल = अन और जल
(च) घर-बाहर = घर और बाहर
(छ) देश-विदेश = देश और विदेश

3. नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए-
सफल, विलक्षण, व्यवहारिक, सजग, आदर्शवादी, शुद्ध।

उत्तर:-

(क) सफल = सफलता
(ख) विलक्षण = विलक्षणता
(ग) व्यावहारिक = व्यावहारिकता
(घ) सजग = सजगता
(ङ) आदर्शवादी = आदर्शवाद
(च) शुद्ध = शुद्धता




4. नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए और शब्द के अर्थ को समझिए –

(क) शुद्ध सोना अलग है।
(ख) बहुत रात हो गई अब हमें सोना चाहिए।

ऊपर दिए गए वाक्यों में ‘सोना’ का क्या अर्थ है? पहले वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है धातु ‘स्वर्ण’। दूसरे वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है ‘सोना’ नामक क्रिया। अलग अलग सन्दर्भों में ये शब्द अलग अर्थ देते हैं अथवा एक शब्द के कई अर्थ होते हैं। ऐसे शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए –

उत्तर, कर, अंक, नग।

उत्तर:-

(क). मेरे प्रश्न का उत्तर दो।
राहुल का घर वहां से उत्तर दिशा में है।

(ख). हमें समय से अपनी आय के कर का भुगतान करना चाहिए।
तुम्हें यह काम अवश्य करना चाहिए।

(ग). इम्तेहान में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए तुम्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
इस नाटक के तीन अंक है।

(घ). कमरे में दो नग किसने रखें हैं?
तुम्हारी अंगुठी का नग बहुत सुंदर और चमकीला है।

5. नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए –

(क) 1.अँगीठी सुलगायी।

     2.उस पर चायदानी रखी।

(ख) 1. चाय तैयार हुई।

      2.उसने वह प्यालों में भरी।

(ग) 1.बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया।

     2.तौलिये से बरतन साफ किए।

उत्तर:-

(क). अँगीठी सुलगायी और उस पर चायदानी रखी।

(ख). चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।

(ग). बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिये से बरतन साफ किए।

6. नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए –

(क)1. चाय पीने की यह एक विधि है।

  1. जापानी में उसे चा-नो-यू कहते हैं।

(ख)1. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था।

  1. उसमें पानी भरा हुआ था।

(ग)1. चाय तैयार हुई।

  1. उसने वह प्यालों में भरी।
  2. फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।

उत्तर:-

(क). चाय पीने की एक विधि है, जिसे जापानी में चा-नो-यू कहते हैं।

(ख). बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था, जो पानी से भरा हुआ था।

(ग). जैसे ही चाय तैयार हुई, वैसे ही उसने प्यालों में भरकर हमारे सामने रख दी।

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