Bhavishyat kaal or Bhavishyat kaal ke bhed

Bhavishyat kaal or Bhavishyat kaal ke bhed – Video Explanation

क्रिया के जिस रूप से आने वाले समय का बोध हो, उसे भविष्यत काल कहते है।

जैसे →

  1.  मेरे पापा का स्थानांतरण अब दिल्ली हो जाएगा।
  2. मैं नए विद्यालय में प्रवेश लूँगा।
  3. वहाँ पर भी अच्छे आचरण वाले नए-नए दोस्त बनाऊँगा।
    इस प्रकार से हम देखते हैं कि उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाएँ आने वाले समय का बोध करा रही हैं। अतः ये भविष्यत् काल है।




भविष्यत् काल के भेद (Bhavishyat kaal ke bhed)

  1. सामान्य भविष्यत्
  2. सम्भाव्य भविष्यत्
  3. आशार्थ भविष्यत्

सामान्य भविष्यत् (Samanya Bhavishyat Kaal)

क्रिया के जिस रूप से उसके भविष्य में, सामान्य रूप में होने का बोध हो, उसे सामान्य भविष्यत् काल कहते है।
→ इसमें क्रिया (धातु) के अन्त में एगा, एगी, एंगे, आदि लगते हैं।

जैसे →

  1. राधा नृत्य सीखने जाएगी।
  2. पापा बाज़ार से सामान लाएँगे।

सम्भाव्य भविष्यत् (Sambhavya Bhavishyat Kaal)

क्रिया के जिस रूप से उसके भविष्य में होने की संभावना का पता चले, वहाँ भविष्यत् काल होता है।
→ इसमें क्रिया के साथ ए, ऐ, ओ, ऊँ, का योग होता है।

जैसे →

  1.  शायद वर्षा बंद हो जाएँ।
  2. संभव है कि राम परीक्षा में पास हो जाएँ।

आशार्थ भविष्यत् (Aasarth Bhavishyat Kaal)

किसी क्रिया के आगामी समय में पूर्ण करने की आशा प्रकट करने वाले रूप को आशार्थ भविष्यत् काल कहते हैं।
→ इसमें क्रिया के साथ ‘इएगा’ लगता है।

जैसे →
1.        आप हमारे घर अवश्य आइएगा।
2.        कल आप गुरुजी के आश्रम अवश्य जाइएगा।




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