NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 2 – Mere Sang Ki Auratein

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 2 – मेरे संग की औरतें (Mere Sang Ki Auratein)

प्रश्न- अभ्यास

1. लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थी?

उत्तर:- लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा नहीं था लेकिन उनके जीवन की कुछ घटनाओं ने लेखिका के सामने उनका जो व्यक्तित्व उभारा, उससे वे काफी प्रभावित हुई। उनकी नानी पारंपरिक, अनपढ़ व पर्दा रखने वाली औरत थी। वे खुद भी घर में स्वतंत्रतापूर्वक रहती थी व दूसरों की स्वतंत्रता व निजत्व का भी पूरा ध्यान रखती थी। उनके अनुसार अपने घर में भी स्वतंत्रतापूर्वक रह लेना बहुत बड़ी व महत्वपूर्ण बात होती है। भले ही उन्होंने अपना जीवन परंपरिक, घरेलू, उबाऊ व पर्दे में रहकर बिताया हो, लेकिन उनमें देश की आजादी के लिए भी एक अद्भुत जुनून था जिसकी वजह से उन्होंने अपने आखिरी समय में लेखिका के नाना के मित्र को अपनी बेटी के किसी साहसी क्रांतिकारी से विवाह किए जाने की इच्छा जताई। इससे उनके साहसीपन व स्पष्टवक्ता होने का पता चलता है।




2. लेखिका की नानी की आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?

उत्तर:- लेखिका की नानी की स्वतंत्रता आंदोलन में कोई प्रत्यक्ष भागीदारी तो नहीं रही, लेकिन आजादी से बेखबर उनमें देश की आजादी को लेकर भरपूर जुनून व क्रांतिकारिता थी; इसी कारण उन्होंने अपनी बेटी की किसी सच्चे व साहसी आजादी के सिपाही से शादी करवाने की इच्छा जाहिर की। वे पारंपरिक, घरेलू व खामोश जीवन जीने में विश्वास रखती थी; लेकिन उन्होंने अपने घर में भी स्वतंत्रता के मूल-भाव को बनाए रखा और घर के भीतर भी अपना जीवन स्वतंत्रतापूर्वक बिताया। उनकी जीवनशैली से स्वतंत्रता का वास्तविक मूलरूप सामने आता है।

3. लेखिका की मां परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में-

(क). लेखिका की मां के व्यक्तित्व की विशेषताएं लिखिए।
(ख). लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द-चित्र अंकित कीजिए।

उत्तर:-

(क). लेखिका की मां दुबली-पतली व बहुत ही नाजुक काया वाली स्त्री थी। उनमें खूबसूरती, नज़ाकत, गैर-दुनियादारी एवं ईमानदारी थी। उनकी कोमल काया की वजह से उनसे कोई भी ठोस काम नहीं करवाया जाता था, लेकिन हर ठोस व हवाई काम के लिए उनकी राय जरूर ली जाती थी, और वैसा ही किया भी जाता था। उन्होंने अन्य भारतीय महिलाओं की तरह अपना पूरा जीवन बच्चों को संभालने, खाना पकाने व घर-बार संभालने में निकालना व्यर्थ समझा; और यहीं कारण था कि उनका अधिकतर समय किताबें पढ़ने और संगीत व साहित्य-चर्चा सुनने में निकलता था। उनके व्यक्तित्व की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएं थी कि वे ना कभी झूठ बोलती थी और ना ही एक की गोपनीय बाद दूसरे पर जाहिर होने देती थी। इसकी वजह से उन्होंने घरवालों और बाहरवालों, दोनों के बीच अपनी एक महत्वपूर्ण जगह बना रखी थी।




(ख). लेखिका की दादी के घर में कुछ लोग अंग्रेजों के प्रशंसक थे और कुछ लोग भारतीयों के। घर में सब स्वतंत्रतापूर्वक, अपने तौर-तरीकों से रहते थे और दूसरों पर अपनी सोच न थोपकर उनकी स्वतंत्रता का भी ध्यान रखते थे। लेखिका की दादी के घर का माहौल सामान्य घरों जैसा नहीं था; हर व्यक्ति को अपना निजत्व बनाए रखने की छूट थी। कोई भी परंपरागत तौर-तरीकों से नहीं चलता था, लेकिन फिर भी किसी ने भी परिवार को नहीं तोड़ा। बच्चों की परवरिश में घर के सभी सदस्यों की बराबर भागीदारी थी।

4. आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों मांगी?

उत्तर:- परदादी एक साधारण व अच्छे विचारों वाली महिला थी। शायद वे समाज में होने वाले लड़का-लड़की के भेदभाव को पसंद नहीं करती थी और अपनी इसी सोच के प्रमाण के तौर पर उन्होंने यह मन्नत मांगी और इसके बारे में सबको बता दिया। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि लेखिका के खानदान में सभी लोग लीक से परे हटकर अपनी स्वयं की सोच पर चलते थे और इसीलिए उनकी परदादी ने भी ऐसा ही किया।

5. डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है- पाठ के आधार पर तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर:- अगर कोई व्यक्ति गलत राह पर चल रहा है, तो उसे डराने-धमकाने, उपदेश देने व दबाव डालने से उसमें द्वेष, खीझ और हीनभावना उत्पन्न हो जाती है, जिसका उसकी स्थिति पर विपरीत असर पड़ता है; जबकि अगर उससे सहज व्यवहार किया जाए, तो उसे सही राह पर लाया जा सकता है। पाठ के अनुसार इसका एक उदाहरण है लेखिका की परदादी जिन्होंने एक चोर को अपना बेटा मानकर उसे सही राह पर ला दिया।

6. ‘शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है।’- इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:- लेखिका का मानना था कि शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है और इसीलिए शादी के बाद जब वे बागलकोट में रह रही थी, जहां उनके बच्चों के लिए स्कूल की सुविधा उपलब्ध नहीं नहीं थी; तब उन्होंने पहले तो वहां के कैथोलिक बिशप से स्कूल खोलने की दरख्वास्त की और जब वे नहीं माने तब उन्होंने स्वयं एक प्राइमरी स्कूल खोला; जहां लेखिका ने खुदने अंग्रेजी, हिंदी व कन्नड़ पढ़ाई। बाद में उन्होंने उसे कर्नाटक सरकार से मान्यता भी दिलवाई।

7. पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा-भाव से देखा जाता है?

उत्तर:- पाठ के अनुसार साहसी, दृढ़-संकल्प करने वाले, सत्यवादी व अच्छे विचार रखने वालों को इंसानों द्वारा श्रद्धा-भाव से देखा जाता है। जो लोग एक व्यक्ति की गोपनीय बात दूसरे व्यक्ति के सामने जाहिर नहीं करते, उनकी समाज में बहुत इज्जत होती है और लोग उनकी मित्रता को बहुत पसंद करते हैं। साथ-ही-साथ लोग ऐसे लोगों की राय लेना भी पसंद करते हैं जो लीक से परे हटकर अपने स्वयं के तौर-तरीकों के अनुरूप जीवन जीना पसंद करते  हैं।

8. ‘सच, अकेलेपन का मजा ही कुछ और है’- इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

उत्तर:- प्रस्तुत कथन लेखिका ने खुदके व अपनी बहन के संदर्भ में बोला है। वे दोनों ही पारंपरिक तौर-तरीकों को न अपनाकर, अपने स्वयं के तौर-तरीकों के अनुरूप जीवन जीना पसंद करती थी। वे बहुत ही ज़िद्दी थी और उनका मानना था कि वे जो सोच लेती है उसे पाकर ही रहती है। लेखिका और उनकी बहन दृढ़-संकल्पि थे और अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जो लोग लीक से परे हटकर निर्णय लेते हैं और दृढ़-संकल्प कर लेते हैं, उन्हें अपनी मंजिल का रास्ता अकेले ही तय करना पड़ता है।  लेकिन लेखिका ने इस अकेलेपन को भी मजेदार बतलाया है क्योंकि इस रास्ते पर चलने से प्राप्त होने वाली मंजिल बहुत ही खूबसूरत व आनंद पूर्ण होती है।

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